पंचर बनाने वाला’ निकला जासूस! सोलर कैमरों से सेना की जासूसी, देशभर में फैला नेटवर्क, 3 गिरफ्तार


 नई दिल्ली / लखनऊ | देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके तार बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

सोलर कैमरों से जासूसी का खुलासा

जांच में सामने आया है कि आरोपी सोलर-पावर्ड कैमरों के जरिए भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखते थे। ये कैमरे खासतौर पर रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील इलाकों के आसपास गुप्त रूप से लगाए गए थे।

कैमरों से सेना की मूवमेंट की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे

फिर इन्हें विदेशी हैंडलर्स को भेजा जाता था

हर फोटो/वीडियो के बदले ₹4000 से ₹6000 तक भुगतान मिलता था

सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह की योजना देशभर में करीब 50 ऐसे कैमरे लगाने की थी, जिससे बड़े पैमाने पर जासूसी की जा सके।

‘पंचर की दुकान’ की आड़ में चल रहा था नेटवर्क

इस नेटवर्क का अहम चेहरा मुजफ्फरपुर निवासी नौशाद अली उर्फ लालू बताया जा रहा है, जो फरीदाबाद में एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम करता था।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस नेटवर्क में कुछ नाबालिगों को भी शामिल किया गया था, जिन्हें कथित तौर पर बहकाकर इस काम में लगाया गया।

फंडिंग और संपत्ति की जांच तेज

नौशाद की गिरफ्तारी के बाद उसके पैतृक गांव (बिहार) में भी जांच तेज कर दी गई है।

परिवार के बैंक खातों और लेन-देन की जांच

अचानक बढ़ी संपत्ति पर नजर

टेरर फंडिंग के स्रोतों की तलाश

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क को फंडिंग कहां से और कैसे मिल रही थी।

हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

मामले के खुलासे के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। कई राज्यों में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता था।

निष्कर्ष

एक साधारण ‘पंचर बनाने वाले’ की आड़ में चल रहा यह जासूसी नेटवर्क यह दर्शाता है कि दुश्मन देश अब नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी हो गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते सूचना दी जा सके।

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